इलाहाबाद में आयोजित जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन की प्रथम बैठक मे हिन्दी चिट्ठाकारी की सार्थकता को सिद्ध करने पर महत्पूर्ण चर्चा हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषयों में से एक ''हिन्दी चिट्ठकारों की आचार संहिता'' का मुद्दा चिट्ठाकारों के लिये सबसे महत्वपूर्ण एवं आवश्यक है कि ब्लागर नैतिक रूप से हिन्दी चिट्ठकारी के प्रति समर्पित हों, चिट्ठकारों कि यही सर्मपण भावना हिन्दी ब्लागिंग को नैतिक बल प्रदान कर सकती है।

अगर चिट्ठकार अपने नैतिक दायित्वो को समझे तो हिन्दी चिट्ठकारी को विवादों से बचाया जा सकता है। जैसा कि आम तौर पर चिट्ठकारों द्वारा किसी अन्य ब्लागरों का नामोल्लेख कर विवादित लेखन किया जाता है इससें चिट्ठाकारी निरंतर पक्षाघात होता है। ब्लागरों को चाहिये कि वह यदि किसी ब्लागर के विरूद्ध भी लिखे तो प्रत्यक्ष नामोल्लेख करने से बचे, बिना नाम के उल्लेख किये भी बड़ी बड़ी बातो को गम्भीरता से रखकर भी पोस्ट तैयार की जा सकती है।
निष्कर्ष
जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन यह घोषणा करता है कि कोई भी ब्लागर चाहे वह वरिष्ठ हो अथवा गरिष्ट, जूनियर हो या पिद्दी, भविष्य मे किसी के खिलाफ अश्लील, अपत्ति जनक, असभ्य,भौड़ा हास्य, भडकाऊ एवं अनावश्यक नामोलेखक करते हुये कोई ब्लागर लेख लिखता है और फला ब्लागर अपत्ति करता है तो उसके खिलाफ जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन जैसे को तैसा नियम के तहत कार्यवाही कि जायेगी।
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